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भाई दौज की कथा

  भगवान सूर्य के पुत्र यमदेव और शनिदेव हुए। भगवान सूर्य की पुत्री यमी कहलाईं। माना जाता है कि यम और यमी दोनों ही जुड़वा संतान थे।

   यम न्याय के आचार्य हुए। उन दिनों सभ्यता की शुरुआत थी। तो व्यवहार के नियम नहीं बने थे। पशु और पक्षियों में आज भी अमर्यादित घटनाएं घटती हैं। मनुष्य का मर्यादा में रहना ही उसे पशु और पक्षियों से अलग करता है। पर मनुष्यों में भी कुछ ऐसे पशु हो जाते हैं जो कुछ भी गलत और सही का विचार नहीं करते।

  कथा है कि बहन यमी, अपने सहोदर भाई की सुंदरता से मुग्ध हो गयी। हालांकि भाई और बहन का प्रेम सबसे बड़ा प्रेम कहा जाता है। पर यमी के मन में कुछ अलग ही चल रहा था। कामदेव के मद में चूर यमी ने अपने भाई यम के समक्ष ऐसा प्रत्साव रखा जिसे मर्यादा का पूरी तरह मिटना कहा जा सकता है। अपने पक्ष में यमी ने काफी तर्क भी दिये, जिन्हें वास्तव में कुतर्क ही कहना ठीक है।

   पर मर्यादा और धर्म के अवतार भगवान यम ने खुद को भी बचाया। साथ ही साथ अपनी बहन यमी को भी समझाने में सफलता प्राप्त की।

   बहन यमी शर्म के मारे यम लोक छोड़ धरती पर रहने लगी। पृथ्वी लोक पर यमुना नदी का रूप रखकर बहने लगीं। मन से भी जिस पाप का चिंतन किया था, उसका प्रायश्चित करने लगीं।

   भगवान यम अपनी बहन से मिलने को तड़प रहे थे। पर संकोच के कारण बहन कभी भी भाई से मिलने नहीं गयीं। तो एक दिन खुद भगवान यम अपनी बहन यमी अर्थात यमुना से मिलने पहुंच गये। भाई बहनों की आंखों में प्रेम के आंसू आ गये।

   आखिर बहन ने अपने भाई को तिलक किया। भाई के शत्रुओं के पराजय की कामना भी की। भगवान यम ने भी बहन यमुना को आशीर्वाद दिया कि वैवस्वत मन्वंतर की अट्ठाईसवीं चतुर्युगी के द्वापर में खुद भगवान कृष्ण आपके किनारे बाल लीलाएं करेंगें तथा आपको अपनी पत्नी भी बनायेंगे। भगवान कृष्ण ही बहन यमुना के पति होने योग्य वर हैं।

   भगवान यम का आशीर्वाद सत्य हुआ। भगवान कृष्ण ने यमुना नदी के तट पर बाल लीलाएं कीं। तथा देवी यमुना ने कालिंदी का रूप रख भगवान कृष्ण से विवाह किया। कालिंदी देवी का विवाह भगवान कृष्ण से भगवान के मित्र अर्जुन के प्रयासों से हुआ था।

   जिस दिन भगवान यम अपनी बहन यमुना से मिलने आये थे, वह कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया थी। उसी समय से भाई दौज का त्यौहार मनाया जाता है। इस दिन भाई बहनों का साथ साथ यमुना नदी में स्नान का बड़ा महत्व है।

बृन्दावन में रास लीला की प्रसिध्द मंडली हरदास जी की मंडली में अक्सर एक पद गाया जाता है। पद तो याद नहीं पर उसका आशय है कि भगवान के पैरों से निकली गंगा परम पवित्र मानी गयी है। फिर जिस यमुना में भगवान कृष्ण खेले, उसकी पवित्रता की तुलना किससे की जा सकती है। 

भाई और बहन के पवित्र प्रेम के प्रतीक यमद्वितिया पर्व की बहुत शुभकामनाएं। 

दिवा शंकर सारस्वत 

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3 Comments

वाह सुन्दर वर्णन

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Reena yadav

15-Nov-2023 03:57 PM

👍👍

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Gunjan Kamal

15-Nov-2023 03:10 PM

👌👏🙏

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